कालीघाट काली मंदिर
अन्य नाम: Kalighat Kali Temple · காளிகாட் காளி கோயில் · కాళీఘాట్ కాళీ ఆలయం
पश्चिम बंगाल देवी
51 शक्ति पीठों में से एक और चार आदि शक्ति पीठों में से एक। कहा जाता है यहाँ सती के दाहिने पैर की उँगलियाँ गिरी थीं।
- देवता
- काली
- परंपरा
- देवी
- स्थान
- कालीघाट, कोलकाता, कोलकाता जिला
- राज्य
- पश्चिम बंगाल
- काल
- वर्तमान संरचना 1809 में सबर्ण रॉय चौधरी परिवार के अधीन पूर्ण हुई। निर्माण 1798 में शुरू हुआ। मंदिर का उल्लेख 15वीं और 17वीं सदी के ग्रंथों में है।
स्थल पुराण
सती की मृत्यु के बाद शिव क्रोधित हो उठे। विष्णु के सुदर्शन चक्र ने उनके शरीर को टुकड़ों में काट दिया। कहा जाता है उनके दाहिने पैर की उँगलियाँ कालीघाट में गिरीं।
विशेषताएँ
- काली दस महाविद्याओं में से एक हैं। मंदिर शक्ति पीठ और चार आदि शक्ति पीठों में से एक है।
- बंगाल की अट-चाला शैली, टेराकोटा आकृतियों के साथ।
- 2024 के जीर्णोद्धार के बाद तीन शिखरों को 50 किलो सोने से मढ़ा गया।
उत्सव
- काली पूजा
- पोइला बैसाख (बंगाली नववर्ष)
- स्नान यात्रा
- दुर्गा पूजा
- अमावस्या के दिन
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग सेनेताजी सुभाष चंद्र बोस हवाई अड्डा, कोलकाता, लगभग 20 किमी।
रेल सेकोलकाता मेट्रो: ब्लू लाइन पर कालीघाट स्टेशन; कोलकाता में कई मुख्य रेलवे स्टेशन हैं।
सड़क सेदक्षिण कोलकाता में। बसें, टैक्सियाँ और मेट्रो सभी पहुँचती हैं।
स्थान अनुमानित है।
जाने से पहले
- शालीन वस्त्र पहनें। जूते-चप्पल मंदिर के बाहर उतारें।
- समय, टिकट के नियम और ड्रेस कोड बदल सकते हैं। यात्रा से पहले मंदिर की सूचना या आधिकारिक वेबसाइट देखें।
- दर्शन, कमरे और विशेष पूजा केवल आधिकारिक काउंटर या वेबसाइट से बुक करें। एजेंटों पर भरोसा न करें।
- अमावस्या, मंगलवार और शनिवार को भीड़ रहती है। जल्दी जाएँ।
- भीतर पूजा शुरू करने से पहले कीमतें तय कर लें। जहाँ संभव हो आधिकारिक काउंटर का उपयोग करें।
इस मंदिर से जुड़ी प्रार्थनाएँ
स्रोत
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