कांचीपुरम वरदराज पेरुमल मंदिर
अन्य नाम: Varadharaja Perumal Temple, Kanchipuram · வரதராஜப் பெருமாள் கோயில் (காஞ்சிபுரம்) · కాంచీపురం వరదరాజ పెరుమాళ్ ఆలయం
तमिलनाडु विष्णु
हस्तिगिरि पहाड़ी पर दिव्य देश। अत्ति वरदर का निवास, अंजीर की लकड़ी की प्रतिमा जो 40 वर्ष में एक बार 48 दिनों के लिए बाहर निकाली जाती है।
- देवता
- वरदराज पेरुमाल (विष्णु), पेरुंदेवी तायार (लक्ष्मी)
- परंपरा
- विष्णु
- स्थान
- कांचीपुरम (छोटा कांची), कांचीपुरम जिला
- राज्य
- तमिलनाडु
- तीर्थ / पवित्र कुंड
- अनंत सरस (अनंत तीर्थम)
- काल
- विकिपीडिया के अनुसार 10वीं सदी में पूर्ण। चोलों ने 1053 में जीर्णोद्धार किया; विजयनगर राजाओं ने बाद में जोड़ा।
स्थल पुराण
सरस्वती ने इंद्र को हाथी बनने का शाप दिया। विष्णु ने हस्तिगिरि, 'हाथी की पहाड़ी', का रूप लेकर उन्हें मुक्त किया।
ब्रह्मा के यज्ञ स्थल को वेगवती नदी से खतरा था। विष्णु ने बहाव रोकने के लिए लेटकर यज्ञ पूरा होने दिया।
ऋषि गौतम के शिष्य, जिन्हें छिपकली बनने का शाप मिला था, विष्णु की कृपा से मुक्त हुए। मंदिर में छिपकली की नक्काशियाँ आज भी हैं।
विशेषताएँ
- अत्ति वरदर: अत्ति (अंजीर) की लकड़ी से तराशी 3 मी. की प्रतिमा, मंदिर के कुंड के भूमिगत कक्ष में रखी जाती है। यह हर 40 वर्ष में एक बार 48 दिनों के लिए बाहर निकाली जाती है। पिछली बार 2019 में और अगली 2059 में।
- कुंड को अनंत सरस (अनंत तीर्थम) कहते हैं।
- विजयनगर काल के 100 स्तंभों वाले सभामंडप में रामायण और महाभारत की नक्काशी और एक ही पत्थर से तराशी जंजीर है।
- मंदिर का पुराना नाम अत्तिगिरि इसे पवित्र अत्ति वृक्ष से जोड़ता है। विकिपीडिया इसे स्थल वृक्ष नहीं बताता, इसलिए हमने वह क्षेत्र खाली रखा है।
- 108 दिव्य देशों में से एक।
उत्सव
- वैकासी ब्रह्मोत्सवम (मई–जून), गरुड़ सेवा और रथ (तेर) जुलूस के साथ
कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग सेचेन्नई हवाई अड्डा, लगभग 65–70 किमी।
रेल सेकांचीपुरम स्टेशन, थोड़ी दूरी पर।
सड़क सेछोटे (विष्णु) कांची में, शहर के पूर्वी ओर। स्थानीय ऑटो और बसें।
स्थान अनुमानित है।
जाने से पहले
- शालीन वस्त्र पहनें। जूते-चप्पल मंदिर के बाहर उतारें।
- समय, टिकट के नियम और ड्रेस कोड बदल सकते हैं। यात्रा से पहले मंदिर की सूचना या आधिकारिक वेबसाइट देखें।
- दर्शन, कमरे और विशेष पूजा केवल आधिकारिक काउंटर या वेबसाइट से बुक करें। एजेंटों पर भरोसा न करें।
- गरुड़ सेवा और अत्ति वरदर के वर्षों में बहुत बड़ी भीड़ आती है। केवल आधिकारिक कतारों का उपयोग करें।
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स्रोत
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